मोर लीलावती के लीला - बियंग

गुरतुर गोठ कहां बोचक के जाबे तें। डोंगरी-पहाड़, अलीन-गलीन, जिहां हाबे, तिहां ले खोज के निकालिहौं। सात तरिया में बांस डारूंगा। केकंरा और मुसुवा के बिला मं हाथ डारहूं। अइसे काहत बइहाय गदहा कस किंजरे लगेंव। हुरहा पोस्टमेन हर, भकाड़ूराम चऊंक मा, अभरा तो गे। मैं आंखी... [पूरी पोस्ट]
writer संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari

बियंग

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[07 Jun 2010 12:54 PM]

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