एक कतरा प्यार...

उसका सच तुम नित निहारती हो,धुप और छाव के बीच पलके बिछाती हो,साईकिल की घंटी बजाता पास वाला हलवाईतुम्हे देखता है कि तुम्हारी नजरे किधर गडी हैं,पर तुम लीन होअपने उस बेइंतहा प्यार को जताने के लिए,मसलन एकटक निहारना,माँ की चौका घर से आवाज़ पर भीतुम निहारती ही रहती... [पूरी पोस्ट]
writer सौरभ के.स्वतंत्र
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[07 Jun 2010 13:02 PM]

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