कुछ सुनती, कुछ कहती बातें........
कुछ सुनती, कुछ कहती बातें.खामोशी से बहती बातें.हाय, ज़माना देख-देख कर,मन भीतर ही रहती बातें.सच कहना तो मुश्किल है भई,मुझको अक्सर कहती बातें.उन्हें समझना कठिन नहीं रे,सीमा में जो रहती बातें.ज्वालामुखी फूटता है तब,जब बातों को सहती बातें.सुन कर हवा-हवाई...
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योगेन्द्र मौदगिल
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[07 Jun 2010 11:29 AM]



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