'दोज़ख..'
..."माज़ी के पन्नों में..निकले हैं..गुल बेहिसाब..दफनाये थे..रिवायतों के खौफ से..सुलगते जज़्बात..दर्द से सरोबार..कुछ सख्त लिबास..कुछ रंगीं मिजाज़..क्यूँ..नूर आजमाता है..दोज़ख..!!"......
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Priyankaabhilaashi
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[07 Jun 2010 11:27 AM]



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