निकालेंगे यहीं से एक नहर ~~
रूठे बादलों तुम्हारा रूठना सबक दे गया बेशक तूँ हमारे दुख-दर्द न हर तय कर लिया है हमने निकालेंगे यहीं से एक नहर ……………………………… जैसे ही बादलों ने धरा को मेंह दी उसे लगा साजन आने वाले हैं वह रचने लगी मेंहदी...
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M VERMA
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[07 Jun 2010 10:32 AM]



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