निगल हजारों जिन्दगी गैस गई भोपाल
निगल हजारों जिन्दगी गैस गई भोपालकितनों के जन्मे कई लूले-लंगड़े लाललूले-लंगड़े लाल, दर्द से भर कर आहेंरहे मांगते 'न्याय' नित्य फैला कर बाहेंदिव्यदृष्टि इस भांति सदी बीती चौथाईकिन्तु दंड की गूंज नहीं पड़ रही सुनाई...
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दिव्यदृष्टि
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[07 Jun 2010 08:51 AM]



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