अब कोई नहीं लौटेगा वहां
कहीं मिलते कभी, कुछ कही, कुछ सुनी होतीकभी दीवानों की कोई याद ही बुनी होतीयूं तो सबने ही चले जाना है इस दुनियां से किसी अजनबी साकिसी के ख्यालों की कोई राह ही चुनी होतीतुम तो बेगाने रहे, बेगाना ही हमको जानाना कभी शिकवा किया, ना कभी मारा तानाख्वामखा ख्यालों...
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Rajey Sha
नज़्म nazm
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[07 Jun 2010 08:49 AM]



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