मौत की तरंगें : एपिसोड - 37
राहुल लाकअप में पड़ा हुआ मन ही मन उस घड़ी को कोस रहा था जब उसने शहर आने का निर्णय लिया था।‘इससे अच्छा तो अपना गाँव था। सब सीधे साधे लोग थे। अगर लड़ाई झगड़ा भी होता तो केवल लाठी डण्डों से सामने आकर। यहाँ तो ऐसा फंसे कि छूटने की कोई राह नहीं...
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zeashan zaidi
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[07 Jun 2010 08:03 AM]



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