मेरे नाम का अश्क

वीर की कलम से दबी हुई मुस्कुराहट से छुपाया तो था, मेरे नाम का अश्क आँखों तक आया तो था| वो बिखरता ही चला गया लम्हा लम्हा, मैंने उसे गले ज़रूर लगाया तो था| मेरे नाम का अश्क आँखों तक आया तो था… शायद वीराना हो जाए वक्त के साथ, हमने आरजू का एक घर बनाया तो... [पूरी पोस्ट]
writer वीर

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[07 Jun 2010 06:57 AM]

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