बस आँखों में दिखता पानी

कुछ लम्हे दिल से... सूखे खेत, सरोवर,झरने, बस आँखों में दिखता पानी हाहाकार मचा है जग में, छाए मेघ न बरसा पानी। भ्रष्टाचार के दलदल में अब, अपना देश धंसा है पूरा कौन उबारे, सबके तन में ठंडा खून रगों का पानी। अब रक्षक को भक्षक कहिए,कलियां रौंद रहे है माली लोग तमाशा देख रहे हैं,... [पूरी पोस्ट]
writer अर्चना तिवारी

ग़ज़ल

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[07 Jun 2010 06:25 AM]

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