साली से जब पूछनीं, काहो दूल्हा कतहूँ सेट भइल, कहली उ मुस्कात, खोजाइल बाटे इंटरनेट पर !

एक शाम मेरे नाम मनोज भावुक की लिखी किताब 'तस्वीर जिंदगी के' केबारे में पिछली पोस्ट में मैंने आपको बताया था कि इस किताब की अधिकांश ग़ज़लों में उनके आस पास का समाज झलकता है। ज़ाहिर है कोई भी ग़ज़लकार अपनी जिंदगी से जो अनुभव समेटता है वही अपनी ग़ज़लों में उड़ेलता है।खुद... [पूरी पोस्ट]
writer Manish Kumar
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[07 Jun 2010 05:20 AM]

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