सुनो कवि !तुम भाषा की देह पर शब्द उलीचते कामगार हो बस !!
खामोशी की चीख सही जगह सुनाई देती है...बुद्धुओं की सवारी करते हैं शब्द. शब्दों की सवारी करते हैं बुद्ध ! जब तक हम शब्द इस्तेमाल करते हैं, हम कोई और हैं. आत्म-बहिष्कृत हैं. self-existed. और जब हम अपना 'स्वयं' होते हैं, तो शब्द नहीं हो सकता, क्योंकि शब्द...
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डॉ .अनुराग
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[07 Jun 2010 04:32 AM]



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