अभिनय किए जा रहा हूँ क्यों ?
क्यों जिए जा रहा हूँ मैं – क्यों?जीवन पथ की इन राहों मेंहैं कितने कंटक और प्रस्तरघिसट-घिसट अपनी देह कोअनजानी मंजिल लिए जा रहा हूँ क्योंक्यों जिए जा रहा हूँ मैं – क्यों?है अंतरमन में छटपटाहटमुख पर छद्म स्मित लिएजीवन के इस रंगमंच परअभिनय किए जा रहा हूँ...
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डॉ. राजेश नीरव
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[06 Jun 2010 23:01 PM]



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