ये इन्सान

शब्द-सृजन की ओर... यह कैसा देश हैजहाँ लोग लड़ते हैं मजहब की आड़ मेंनफरत के लिएपर नहीं लड़ता कोई मोहब्बत की खातिर।दूसरों के घरों को जलाकरआग तापने वाले भी हैंपर किसी को खुद के जलतेघर को देखने की फुर्सत नहीं।एक वो भी हैं जो खुद को जलाकरदूसरों को रोशनी देते हैंपर नफरत है उन्हें... [पूरी पोस्ट]
writer KK Yadava

कविता

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[06 Jun 2010 22:30 PM]

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