बोध के सोपान

पिनाकपाणि लगता ही है तुम्हें कि चुप हूँ भीतर है तुमुल कोलाहल कारों की पों पों दोपाये की भों भों, सुन नहीं पातातुम समझते हो ,बहरा हूँ युक्लिप्टस, यह शैतान गाछ  सर पर खड़े बालों वाला छोकरा /वो सफ़ेद टोपी वाला मेरी बेबसी पर हंसते हैं ,... [पूरी पोस्ट]
writer Pinaakpaani
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[30 May 2010 14:03 PM]

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