कस्तूरीमृग

पिनाकपाणि न जाने कौन  आवाज़ देता रहा कि 'हूँ' मैं,देख मुझे  सम्मोहित सा ढूँढा किया उसे  किताबों में,सुरों के सागर में तितली के परों में और  चिडिया की चहक में  हवाओं के साथ  पेड़ों के झूलने में  पत्तों से छन कर आती... [पूरी पोस्ट]
writer Pinaakpaani
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[31 May 2010 13:19 PM]

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