उत्सव
आओ दिनों पर लगाएं ठप्पेऔर मनाएँ उत्सव बीवी की चूड़ी बिके तो छल्लों का क्या शराब पियें और नाचें ,क्योंकि कल के लिए नहीं है अपने पास कोई और ठप्पा कल से फिर रेतेंगे एक दूसरे के गले आओ आज तो गले मिल लें ,सहला लें...
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Pinaakpaani
utsav
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[30 May 2010 13:40 PM]



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