सौंधी सी महक

पिनाकपाणि बरसों से  तपती रेत पर  बरखा की पहली फुहार से उठी  सौंधी सी महक ,तुझे पाकर   बहुत डर गया हूँ मैं  बालू के महल भरभराते  ढहते टीलों के बियाबान समंदर में  तुम टिकोगी कैसे ! छेद गई है अंतस  तुम्हारी अल्पायु इयत्ता ... [पूरी पोस्ट]
writer Pinaakpaani
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[23 May 2010 14:50 PM]

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