जैवीयता केवल मैथुन और जगह की मारामारी (territorialism ) ही नहीं है जैसा कि मेरे कुछ काबिल दोस्त सोचते आये हैं! ..

क्वचिदन्यतोअपि..........! अनवरत पर हुई इस चर्चा ने मुझे प्रेरित किया है कि मैं मनुष्य की जैवीयता पर कुछ बातों को स्पष्ट करुँ ...जन स्मृतियाँ बहुत अल्पकालिक होती हैं ..मैंने इसी ब्लॉग पर मनुष्य की जैवीय प्रवृत्तियों और सांस्कृतिक  विकास पर एक विस्तृत पोस्ट पहले ... [पूरी पोस्ट]
writer Arvind Mishra
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[06 Jun 2010 21:43 PM]

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