विचारों की फलती लहरें
अबाध गति से बहती नदी की लहरेंअचानक फल उठती हैं और पौधे बन जाती हैं,ऐसा अगर संभव हो जाए तो नदी का प्रवाहटूट कर बिखर जाएगा,हमारी सारी मानसिक चेतना या उर्जाउसमें उगते फलते विचारों के कारणइसी तरह टूट कर बिखरती है, इन विचारों से तादात्म हटते हीतन-मन का उर्जा...
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Arun Khadilkar
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[06 Jun 2010 20:57 PM]



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