कबीर के श्लोक - २४

*साधना* कबीर परदेसी कै घाघरै, चहु दिसि लागी आगि॥ खिंथा जलि कोइला भई, तागे आंच न लाग॥४७॥ कबीर जी कहते है कि यह जो परदेसी है इस के घाघरे के चारो ओर आग लगी हुई है। इस की जो गोदड़ी है वह तो जल कर कोयला हुई जाती है।लेकिन इस के बीच जो धागा है उसे आँच तक नही लगती। कबीर... [पूरी पोस्ट]
writer परमजीत सिँह बाली
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[06 Jun 2010 20:44 PM]

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