एक ग़ज़ल : लबों पर दुआएं ......

हँसते रहो हँसाते रहो ग़ज़ल :लबों पर दुआएं..... लबों पर दुआएं , पलक पर नमी है बता ज़िन्दगी! अब तुझे क्या कमी है? हज़ारों मसाइल ,हज़ारों मसाइब मगर फिर भी ज़िन्दा यहाँ आदमी है मिरी मुफ़लिसी पे तरस खाने वालों तुम्हारा यह रोना फ़क़त मौसमी है हवादिस में जीना ,हवादिस में मरना ग़रीबों को क्या... [पूरी पोस्ट]
writer आनन्द पाठक
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[05 Jun 2010 10:51 AM]

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