कथा-गीत: मैं बूढा बरगद हूँ यारों... ---संजीव 'सलिल'

नन्हा मन कथा-गीत:मैं बूढा बरगद हूँ यारों...संजीव 'सलिल' **मैं बूढा बरगद हूँ यारों...है याद कभी मैं अंकुर था. दो पल्लव लिए लजाता था. ऊँचे वृक्षों को देख-देख-मैं खुद पर ही शर्माता था. धीरे-धीरे मैं बड़ा हुआ.शाखें फैलीं, पंछी आये.कुछ जल्दी छोड़ गए मुझको-कुछ बना... [पूरी पोस्ट]
writer आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'

samyik hindi kavita

views
9
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[06 Jun 2010 14:20 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix