अलविदा ब्लॉग्गिंग - राजीव तनेजा
“चढ गया ऊपर रे…अटरिया पे…अटरिया पे लौटन कबूतर रे"… “गुटर-गुटर…गुटर-गुटर"… “ओह्हो!…दुबे जी आप".. “जी तनेजा जी…मैं"… “कहिए!…कैसे याद किया?”.. “ये मैं क्या सुन रहा हूँ?”… “क्या?”.. “यही कि आपने हमेशा के लिए ब्लॉग्गिंग तो तिलांजलि दे बूढ़े...
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राजीव तनेजा
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[06 Jun 2010 14:00 PM]



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