नज्म : जिंन्दगी का सफ़र

Deepak Kumar तेरा प्यार मेरे लिये, खुदा हो गया ।क्या था मैं कल, आज क्या हो गया ॥नफ़रत की दुनिया, मतलब के रिश्ते ।मुहब्बत का दामन, फिर जुदा हो गया ॥महफिलें ये अब तो, सजती नहीं हैं ।यारों की दुनिया में, बदनाम हो गया ॥तन्हा जिन्दगी का सफ़र, कटता नहीं होगा ।लुट लुट कर... [पूरी पोस्ट]
writer Deepak Kumar
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[06 Jun 2010 11:44 AM]

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