नज्म : यादें

Deepak Kumar काम में, तमाम ज़िन्दिगी कट जाती है |तन्हाई में उनकी याद, और उभर आती है ||उन्होने न वफ़ा की, न बेवफ़ाई हमसे |अपने को छुपाकर भी, परछाई नज़र आती है ||दिल में दर्द, चेहरे पर तबस्सुम की लकीर |किसी को पाने या खोने से, ज़िन्दगी बदल जाती है ||बिछड्ती मंजिलों की ओर,... [पूरी पोस्ट]
writer Deepak Kumar
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[06 Jun 2010 11:08 AM]

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