"कल मुझको तुम भूल न जाना!" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

नन्हें सुमन आमों के बागों में जाकर,आम टोकरी भरकर लाया!घर के लोगों ने जी भरकर,चूस-चूस कर इनको खाया!! प्राची बिटिया और प्रांजल,बड़े चाव से इनको खाते!मीठे-मीठे और रसीले,आम बहुत इनको हैं भाते!!राज-दुलारो, नन्हे-मुन्नों,कल मुझको तुम भूल न जाना!जब मैं बूढ़ा हो जाऊँगा,इसी... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

बालकविता

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[06 Jun 2010 10:52 AM]

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