कौन जिन्दा है कब तलक जाने

मेरी ग़ज़लें, मेरे गीत/प्रसन्न वदन चतुर्वेदी आज एक अरसे बाद मैं फिर लौटा हूँ ब्लाग की दुनिया में......है न....! जब मैं वाराणसी से बाहर था तो मेरे कार्यक्षेत्र के एक पुराने एडवोकेट इस दुनिया को छोड़ गये । इसी परिस्थिति में पूर्व की लिखी गयी मुझे अपनी कुछ पंक्तियाँ याद आ गयीं जो मैं आप से जरूर बांटना... [पूरी पोस्ट]
writer प्रसन्न वदन चतुर्वेदी

ग़ज़ल

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[06 Jun 2010 10:15 AM]

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