कौन जिन्दा है कब तलक जाने
आज एक अरसे बाद मैं फिर लौटा हूँ ब्लाग की दुनिया में......है न....! जब मैं वाराणसी से बाहर था तो मेरे कार्यक्षेत्र के एक पुराने एडवोकेट इस दुनिया को छोड़ गये । इसी परिस्थिति में पूर्व की लिखी गयी मुझे अपनी कुछ पंक्तियाँ याद आ गयीं जो मैं आप से जरूर बांटना...
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प्रसन्न वदन चतुर्वेदी
ग़ज़ल
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[06 Jun 2010 10:15 AM]



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