'ये हौसले कभी कम न हों'
पुनः संपादित ----------------------------------------वक्त के चलने का सारा खेल है, जब ज़िन्दगी ,कैसे हो सकता है भला, खुशियाँ मिलें पर गम न हों,ज्यादा क्या मांगू मैं तुझसे, तूने ख़ुदा सब है दियाइतना कर एहसान बस, ये हौसले कभी कम न...
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योगेश शर्मा
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[06 Jun 2010 09:34 AM]



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