किसान एवं टुकड़े दो रचनाएं
किसानफटे पुरानेमटमैले से कपड़ेटूटे जूतेमटमैले से जख्मी पैरकंधे पर रखा परनाढही सी पगड़ीअकेले ही खुद से बातेंकरता जा रहा हैशायदमेरे देश का कोई किसान होगा।परना- डेढ़ मीटर लम्बा कपड़ाटुकड़ेबचपन मेंजब एक रोटी थी,तो माँ ने दो टुकड़े कर दिए,एक मेरा, और एक भाई कालेकिन...
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Kulwant Happy
कुलवंत हैप्पी
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[06 Jun 2010 08:33 AM]



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