किसान एवं टुकड़े दो रचनाएं

युवा सोच युवा ख्यालात किसानफटे पुरानेमटमैले से कपड़ेटूटे जूतेमटमैले से जख्मी पैरकंधे पर रखा परनाढही सी पगड़ीअकेले ही खुद से बातेंकरता जा रहा हैशायदमेरे देश का कोई किसान होगा।परना- डेढ़ मीटर लम्बा कपड़ाटुकड़ेबचपन मेंजब एक रोटी थी,तो माँ ने दो टुकड़े कर दिए,एक मेरा, और एक भाई कालेकिन... [पूरी पोस्ट]
writer Kulwant Happy

कुलवंत हैप्पी

views
14
upvote
3
downvote
0
rating
3
comments
8
[06 Jun 2010 08:33 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix