दस करोड ये गधे क्या बनेंगे हुक्मरां....अपनी तो दुआ है ये सदर तू रहे सदा ...मैंने उससे ये कहा...
हबीब जालिब के इस गीत की रिकार्डिंग को लगातार सुना मैंने। इसमें पाकिस्तान के सदर और वहां की राजनीतिक परिस्थितियों पर गहरा व्यंग्य है। मैंने उससे ये कहा – हबीब जालिब – गीतमैंने उससे ये कहा ...................................... ये जो दस करोड है जहर का...
[पूरी पोस्ट]
12
2
0
2
0
[06 Jun 2010 08:37 AM]



Shuffle








