हम भी जियेंगे कभी खाक से निकलकर
बना उन्ही पत्थरों को निशाना हम फिर से गिर गिर जायेंगे हर हार के सीने से लिपट गल्तियाँ फिर वहीं दोहरायेंगे...
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shoonyakonn
हिन्दीकविताgeetगीत
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[06 Jun 2010 07:32 AM]



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