ग़ज़ल
जिन ख्वाबों से नींद उड़ जाये ऐसे ख्वाब सजाये कौन \इक पल झूठी तस्कीं पा कर सारी रात गवाएं कौन \यह तन्हाई यह सन्नाटा दिल को मगर समझाए कौन \इतनी काली रात में आखिर मिलने मिलाने आये कौन \इक दो धोखे हों तो यारों दिल रखने को खा भी लेंयह तो उसकी...
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nirupama varma
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[06 Jun 2010 07:19 AM]



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