उस पगली लड़की के बिन

आचार्य अमावस की काली रातों में दिल का दरवाजा खुलता है,जब दर्द की प्याली रातों में गम आंसू के संग होते हैं,जब पिछवाड़े के कमरे में हम निपट अकेले होते हैं,जब घड़ियाँ टिक-टिक चलती हैं,सब सोते हैं, हम रोते हैं,जब बार-बार दोहराने से सारी यादें चुक जाती हैं,जब... [पूरी पोस्ट]
writer acharyakeshav

कुमार विश्वास

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[06 Jun 2010 04:29 AM]

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