शंख और सीपियां...
शंख और सीपियां...24th,may, 2010अतृप्त, बैचेन, छल, नींद, समझ..... और फिर हम सुखी रहने लगे। कहते थे कि हम किसी भी तरह से गुज़र जाएगें, धीरे-धीरे ही सही पर हम गुज़र ही जाएगें। फिर बहुत समय बाद......’उदासी’ का कोई संबंध ’उदासीनता’ से नहीं है... या है...?...
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मानव
कहानी...
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[06 Jun 2010 04:13 AM]



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