यादें : कैसे लगी ये नौकरी - हरि प्रसाद शर्मा
आज भी मेरी स्मृति में अपने उस साक्षात्कार की यादें ताजा हैं जो उस नौकरी में आने का ज़रिया बना जो मैं आज कर रहा हूँ। साक्षात्कार से पहले लिखित परीक्षा होती है और उसे पास करने के लिए उसमें बैठना पड़ता है। हम शुरू से ही एक अगंभीर तबियत के मालिक थे।जब ये...
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H P SHARMA
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[06 Jun 2010 04:05 AM]



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