wo fir nahi aatey...
मौत के पंजों कि खरोंच डिब्बों पे देखके अब सहन नहीं होता हे भगवन! इससे बेहतर तो तू सबको दिल का दौरा से मार देता कोई मिटाने पे तुला है खुद को तो कोई बचाने पे तुला है खुद को कौन जीतेगा? जवाब सिर्फ वक़्त देगा तब तक ये खेल चलता रहेगा, चलता रहेगा न...
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Ajayendra Rajan
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[06 Jun 2010 04:01 AM]



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