'उड़ जायेगा हंस अकेला' :कुमार गंधर्व। अफ़सोस उनकी फ़रमाईश पूरी न हो सकी और वो चली गयीं।
विविध-भारती और रेडियोवाणी दोनों ही प्लेटफार्म ऐसे हैं जहां गाने सुनने सुनाने का सिलसिला चलता रहता है। अब तो इसमें फेसबुक भी शामिल हो गया है। ज़ाहिर है कि सोशल-नेटवर्किंग के ज़रिए 'अपनी तरह' के लोग आपको अपने आप ही मिलते रहते हैं। मुझे ख़ुशी है कि...
[पूरी पोस्ट]
yunus
19
3
0
3
19
[06 Jun 2010 03:29 AM]



Shuffle








