कहीं खो न जाएं ये तारे जमीं पर

Navbharat Times Blogs कुछ दिनों पहले मनोवैज्ञानिकों की एक टीम मुझसे मिलने आई थी। युवाओं और बच्चों में आत्महत्या के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए वे कुछ उपाय करना चाहते थे। इस कैंपेन में मुझे भी शामिल होना था। उनके जाने के बाद काफी देर तक मैं यह सोचता रहा कि समाज में आखिर क्यों... [पूरी पोस्ट]
writer प्रसून जोशी
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[06 Jun 2010 01:47 AM]

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