मेरी पीड़ा और एकाकी मन
अकेलेपन की छाया सघनमेरी पीड़ा और एकाकी मनअपने से ही बात करूँअपने सुख-दुख का हाल कहूँअपने घावों को खुद सहलाऊँखुद अपनी पीड़ा को गाऊँअकेलेपन की छाया सघनमेरी पीड़ा और एकाकी मनसत्य के क्षितिज पर पहुँच करअंतिम सत्य शून्य ही पातायह नहीं अंतिम सत्यक्यों बार-बार...
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डॉ. राजेश नीरव
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[05 Jun 2010 23:54 PM]



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