प्यार पर कविता -भाग तेरह
अभी प्रेम भाव के ऊपर रची ये कविता आपके श्री चरणों में समर्पित हैं । बस बैठे बैठे बन गयी कुछ सच हैं कुछ कल्पना । पहली वाली कड़ीयो को भी जोड़ कर पढ़ सकते हैं । ब्लॉग पाठक लिंक भी कविता के आखिरी में पढ़ सकते हैं ।प्यार में तो जीने के अब ना सहारे ही रह गए नदी...
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Virender Rawal
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[05 Jun 2010 23:29 PM]



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