मुझे सुहाता मुरझाना
तुम्हें फूल का खिलना भाता मुझे सुहाता मुरझाना,तुम्हें न भाते साश्रु नयनमुझको न सुहाता मुस्काना ! तुम पूनम की सुघर चाँदनीपर बलि-बलि जाते साथी,मुझको शांत अमावस्या का भाता है यह सूना बाना !उदित सूर्य की स्वर्ण रश्मियाँ तुम्हें मधुर कुछ दे जातीं,मुझे क्षितिज...
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Sadhana Vaid
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[05 Jun 2010 20:57 PM]



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