बड़ी भूख लगी है माता जी
बड़ी भूख लगी है माता जी, दो टूक खिला दो माता जी;नाम बड़ा तेरा मैं गाऊंगा, हो सका तो काम भी आऊंगा.भूखी आंत मेरा हृदय मरोड़ती है, अन्न नहीं, तो रक्त ही निचोड़ती है क्यूँ मैं ही मिला, उसे एक दंड पायी था इस, निष्ठुर समाज के व्यंगों का उत्तरदायी था...
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विशाल कश्यप
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[05 Jun 2010 19:26 PM]



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