हस्ती
बात बेबात कभी रुत है पलटती मस्ती कभी नशे सी है उतरती बनते बिगड़ते दायरों में टूटती-चढ़ती लहरों सी हस्ती...
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shoonyakonn
कविताHindi poemगीतहस्ती
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[04 Jun 2010 04:28 AM]



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