विलम्ब न करना तुरंत आना
विलम्ब न करना तुरंत आना छूटा साथ अधीर रहेगा होंठों पर कुछ चन्दन बाकी है अभी तो सांस महक रही है बहकी सांस अधीर रहेगी विलम्ब न करना तुरंत आना अभी तो आँखें बंद हैं सांझे स्वप्न बह रहे हैं बंद आँखें खुल न पाएंगी विलम्ब न करना तुरंत आना अभी तो हाथ भरे थे [...]...
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shoonyakonn
कविताkavitaHindi poemगीत
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[05 Jun 2010 11:28 AM]



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