गणतंत्र दिवस

आचार्य मरते मिटते रहते कई दंगों में ,मरना हो तो वतन पे मरोवतन की मौत बड़ी रंगीन होती है...पैरों से ना रौंदों माथे से लगा लो देश की मिट्टी तो सिंदूर होती है...आज हम गणतंत्र दिवस की 61वी वर्षगांठ मना रहे हैं...यूं तो हमें आजादी 15 अगस्त को ही मिल गई थी लेकिन 26... [पूरी पोस्ट]
writer acharyakeshav
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[24 Jan 2010 04:33 AM]

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