गजल : अंजाम
न कोई खत, न कोई खबर मिलता रहा हूँ उनसे, खुद से बेखबर |किसे दूं आवाज, किसको बुलाऊँ मैं पासचाहत के पैमाने में, शब्द हुए बेअसर |इन वादियों में तुझको, मै ढूंढ़ रहाछुपा के दिल में, किसी को बेनजर |ख्वाबों की इबाद्त तो, की थी हमनेअब खुदा का नाम लूं, या पुकारूं...
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Deepak Kumar
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[05 Jun 2010 17:09 PM]



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