हाँ वह परमेश्वर का प्रतीक थी....-देव

मेरी दुनिया मेरा जहां.... एक छोटी बच्ची....अठखेलियाँ कर रही थी...खेल रही थीएक गुब्बारे सेकभी ऊपर उछाल देतीकभी उसे उठाने दौड़ पड़तीकभी पापा को खींचतीकभी चाचू को खींचती....कभी जोर जोर से चिल्लातीतो कभी एकदम चुप हो जाती....उसके खेल में कितनी सजीवता थी...उसके प्रेम में कितनी आत्मीयता... [पूरी पोस्ट]
writer देव कुमार झा
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[05 Jun 2010 14:13 PM]

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