मैं बहुत सेलेक्टिव हूँ....

काव्य मंजूषा मैं बहुत सेलेक्टिव हूँअपने पिता को अपनी माँसे ज्यादा प्यार करती हूँलेकिन मैं माँ पर भी मरती हूँमुझे सफ़ेद साड़ी ज्यादा पसंद हैक्योंकि वो मुझपर फब्ती हैफिर भी कोई-कोई काली साड़ीभी मुझ पर जंचती है मुझे मीठा पसंद हैमैं खट्टा नहीं खाती हूँ लेकिन आम का अचारचट... [पूरी पोस्ट]
writer 'अदा'
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[05 Jun 2010 12:56 PM]

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