जनाब "सरवर" की एक ग़ज़ल :क्या तमाशा देखिये .....
ग़ज़ल : क्या तमाशा देखिये ..... क्या तमाशा देखिए तहसील-ए-लाहासिल में है एक दुनिया का मज़ा दुनिया-ए-आब--ओ-गिल में है देख ये जज़्ब-ए-मुहब्बत का करिश्मा तो नहीं कल जो तेरे दिल में था वो आज मेरे दिल में है मैं भला किस से कहूँ ,क्या क्या कहूँ ,कैसे कहूँ ? मौत से...
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आनन्द पाठक
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[05 Jun 2010 11:03 AM]



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